धर्म को मिटाने के
किसी भी क्रांतिकारी उद्यम के बाबजूद भी
अक्षर, अक्षय, और शाश्वत रहेगा धर्म
उर्जा संरक्षण के सिद्धान्त की तरह
अनादि और अनश्वर होगा
प्रतीत होगा रूपान्तरण, भाषित होगा रूप-भेद
यथावत रहेगी उसकी संरचना – नियामकता
अक्षुण्ण रहेगा उसका प्रभाव
हमेशा की तरह
वही सौंपेगा सत्ता को वैधता हमें इयत्ता
संस्कृति नीति आचार दर्शन के शास्त्र और संहिताओं
का वही होगा प्राण
समाज साहित्य कला शिल्प करेगी उसकी प्रदक्षिणा
ज्ञान विज्ञान शक्ति संस्कृति को करेगा चैतन्य
पर रूपान्तरण के बाद इसका नाम
हिन्दू मुस्लिम क्रिश्चन यहूदी या बौद्ध पारसी नहीं होगा
इसबार रूपभेद से इसका नाम होगा
बाज़ारवाद उपभोक्तावाद अर्थवाद यंत्रवाद
उपभोग होगा आध्यात्म उपभोक्ता याजक होंगे
अर्थ मोक्ष-साधन होगा पुरोहित यजमान भी होंगे
हमेशा की तरह अर्थ-वंचित ही होंगे शुद्र
हमारा भगवान यंत्र इसबार भी पत्थरों की तरह निर्जीव होगा
बाज़ार के तीर्थस्थान में खोजी जाएगी मुक्ति
बाज़ार के विस्तार के साथ संपन्न होगी धर्म की जय-यात्रा
ब्राण्ड की छाप-तिलक लगाये अर्थ-महर्षि करेंगे यज्ञ
हविष्य के रूप में डाली जाएगी यज्ञ-वेदी में
जल जंगल पवन, यज्ञ-धूम लील लेगा पारिस्थितिकि
कार्बन के अगरु से सुरभित होगा मन-प्राण वातावरण
धर्म के निमित्त और धर्म-विहित अप्सराये कहलायेंगी
सुंदरी {विज्ञापन} बसेंगी बाजारों के देवस्थानों में
हम यानि मनीषी अर्थ-अर्चित हो रचेंगे
भोग-उपभोग का शास्त्र –संहिता
ऋचाओं में गायेंगे अर्थ-यंत्र लीला .
....................................................................{राजशेखर}
किसी भी क्रांतिकारी उद्यम के बाबजूद भी
अक्षर, अक्षय, और शाश्वत रहेगा धर्म
उर्जा संरक्षण के सिद्धान्त की तरह
अनादि और अनश्वर होगा
प्रतीत होगा रूपान्तरण, भाषित होगा रूप-भेद
यथावत रहेगी उसकी संरचना – नियामकता
अक्षुण्ण रहेगा उसका प्रभाव
हमेशा की तरह
वही सौंपेगा सत्ता को वैधता हमें इयत्ता
संस्कृति नीति आचार दर्शन के शास्त्र और संहिताओं
का वही होगा प्राण
समाज साहित्य कला शिल्प करेगी उसकी प्रदक्षिणा
ज्ञान विज्ञान शक्ति संस्कृति को करेगा चैतन्य
पर रूपान्तरण के बाद इसका नाम
हिन्दू मुस्लिम क्रिश्चन यहूदी या बौद्ध पारसी नहीं होगा
इसबार रूपभेद से इसका नाम होगा
बाज़ारवाद उपभोक्तावाद अर्थवाद यंत्रवाद
उपभोग होगा आध्यात्म उपभोक्ता याजक होंगे
अर्थ मोक्ष-साधन होगा पुरोहित यजमान भी होंगे
हमेशा की तरह अर्थ-वंचित ही होंगे शुद्र
हमारा भगवान यंत्र इसबार भी पत्थरों की तरह निर्जीव होगा
बाज़ार के तीर्थस्थान में खोजी जाएगी मुक्ति
बाज़ार के विस्तार के साथ संपन्न होगी धर्म की जय-यात्रा
ब्राण्ड की छाप-तिलक लगाये अर्थ-महर्षि करेंगे यज्ञ
हविष्य के रूप में डाली जाएगी यज्ञ-वेदी में
जल जंगल पवन, यज्ञ-धूम लील लेगा पारिस्थितिकि
कार्बन के अगरु से सुरभित होगा मन-प्राण वातावरण
धर्म के निमित्त और धर्म-विहित अप्सराये कहलायेंगी
सुंदरी {विज्ञापन} बसेंगी बाजारों के देवस्थानों में
हम यानि मनीषी अर्थ-अर्चित हो रचेंगे
भोग-उपभोग का शास्त्र –संहिता
ऋचाओं में गायेंगे अर्थ-यंत्र लीला .
....................................................................{राजशेखर}
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें