अब जबकि मैं
तुम्हारे प्यार में हूँ
चूक गयी है मेरी भाषा , मेराकौशल
व्यर्थ हो गयी है सारी युक्तियाँ
तुम तक पहुँच पाने की
आंदोलित और तरंगित हृदय में
अनगिनत निर्दोष अनुभूतियों
और सच्ची संवेदनाओ के बाबजूद भी
प्रेम की भाषा और अभिव्यक्ति के नाम पर
शेष है बस हकलाहट
जिसे तुम शायद ही बुझ पाओगी
(राजशेखर)
तुम्हारे प्यार में हूँ
चूक गयी है मेरी भाषा , मेराकौशल
व्यर्थ हो गयी है सारी युक्तियाँ
तुम तक पहुँच पाने की
आंदोलित और तरंगित हृदय में
अनगिनत निर्दोष अनुभूतियों
और सच्ची संवेदनाओ के बाबजूद भी
प्रेम की भाषा और अभिव्यक्ति के नाम पर
शेष है बस हकलाहट
जिसे तुम शायद ही बुझ पाओगी
(राजशेखर)
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